एक घर है जिसे सजाने का शौंक है मुझे
और एक कोना है जो मुझसे संवारा नही जाता
एक माज़ी* है जिसे मिटाने की कोशिश जारी है
और एक तू है जो मुझसे भुलाया नही जाता
एक दिल है जिसे दुनिया से बचाना है
और एक आंसू है जो मुझसे छुपाया नही जाता
एक चाँद है जिसे फतह कर लिया है मैने
एक मोहल्ला है जो मुझसे मनाया नही जाता
एक किताब है जो तेरे नाम लिख रहा हूँ
और एक शेर है जो मुझसे सुनाया नही जाता
*माज़ी = past

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