Wednesday, June 10, 2020

एक बार फिर

ख़ाक ज़माना कहता है, तो कहने दो हम सुन लेंगे
सुनसान पड़ी इन राहों को, फिर नयी सी धुन देंगे

छीन ले सब कुछ मेरा जो है, मैं ही मुझ में ना रहूँ
अपना क्या है, खुद को फिर से, नए सिरे से बुन लेंगे

दिल बांटा है कईयों को, कईयों ने तोड़ा भी है
तू भी इसे तोड़ दे यारा, टुकड़े फिर से चुन लेंगे

खुद पे है विश्वास जब तक, तब तक चलता जाऊंगा
थम गया मैं जिस दिन, उस दिन मौत की आहट सुन लेंगे 

अविरत

फूल गुलशन में लगायें हैं, लगे रहन दो
खाब आँखों में सजायें हैं, सजे रहन दो 

कांच की ये ज़िन्दगी, टूटेगी हाँ एक दिन 
इसमें अभी थोड़ी शराब, पड़े रहन दो

हाथों का छूटना, तो लाज़मी है जनाब 
डोर दिल से दिल की है, जुड़े रहन दो 

एक अरसा हुआ उन्हें देखे हुए अब 
यादों में मुस्कान को, बने रहन दो 

आज फिर वो गीत जब रेडियो पे आया 
दिल से फिर आवाज़ आयी, चले रहन दो  

Thursday, March 12, 2020

इन्द्रधनुष


कभी इन्द्रधनुष देखा है तुमने?
बेताबी, शांति, खामोशी,
खुशी, गम, गुस्सा और प्यार
अपने सात रंगों में समेटे हुए
कितना खूबसूरत लगता है दूर से

लेकिन जब पास जाओगे, तो जानोगे
कि वो है भी तो नहीं
है तो बस हवा और नज़रों का धोखा

मैं वही इन्द्रधनुष हूं
हूं भी और नहीं भी ।