Saturday, February 10, 2024

भागती सी ज़िन्दगी, देखो आकर के रुकी

 भागती सी ज़िन्दगी, देखो आकर के रुकी

खोयी हुई गुम-सुम सी, आज फिर शभ है खड़ी


इस शभ से तुम जा के कहो, मुस्कुराना थोड़ा सीख ले

जो बीत गया वो दिन था एक, बाकी है पूरी ज़िन्दगी


खौफ औ' ग़म के साये में, शहर सारा सो रहा

खामोशियाँ, कुछ आहटें, हैं छेड़ती, हैं जागती


बहती पवन औ' वक़्त गुज़रे, याद दिलाये ज़िन्दगी

थम गयी है आज हवा, थम गयी है हर घडी


कुछ जो तूने खुद से किये थे, कुछ जो अपने यार से

'धूरे रह गए वादे वो सब, 'धूरी है वो बंदगी


हस्ते चेहरों में मुब्तला*, बोझ तो देखो ज़रा

इतना क्यों उठाये हो? लेके जाओगे कहीं?


*मुब्तला = फँसा हुआ


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