चलो चलते हैं
चलते हैं उस ओर जहाँ
ज़िन्दगी कुछ नयी हो
कुछ दर्द हों, मरहम हों
पर आँखों में न नमी हो
जहाँ आँखे तुम्हे आंके ना
नफरत से कोई ताँके ना
जहाँ खुद को रंगने के लिए ,
किरमिच तमाम मिलते है
चलो चलते हैं
चलते हैं उस ओर जहाँ
ना कोई बंदिश है, ना गुनाह
ना कोई किसी का शागिर्द,
हर कोई खुद ही का खुदा
जहाँ बोली इतनी माहिर नहीं
कि लिख दे कहानी क़त्ल की
जहाँ आँखों में डर-खौफ नहीं
अरमान पलते हैं
चलो चलते हैं
चलते हैं उस ओर जहाँ,
खुद की ओर चले जो रस्ता
छोड़ दुनिया की पाठशाला
टांग अपने सपनो का बस्ता
जहाँ कीलें न कर पाएँ छेद पॉंव में
देख सके खुद को अपने परछाओं में
जहाँ सितारों की छांव में
सूरज ढलते हैं
चलो चलते हैं
चलते हैं उस ओर जहाँ
ज़िन्दगी कुछ नयी हो
कुछ दर्द हों, मरहम हों
पर आँखों में न नमी हो
जहाँ आँखे तुम्हे आंके ना
नफरत से कोई ताँके ना
जहाँ खुद को रंगने के लिए ,
किरमिच तमाम मिलते है
चलो चलते हैं
चलते हैं उस ओर जहाँ
ना कोई बंदिश है, ना गुनाह
ना कोई किसी का शागिर्द,
हर कोई खुद ही का खुदा
जहाँ बोली इतनी माहिर नहीं
कि लिख दे कहानी क़त्ल की
जहाँ आँखों में डर-खौफ नहीं
अरमान पलते हैं
चलो चलते हैं
चलते हैं उस ओर जहाँ,
खुद की ओर चले जो रस्ता
छोड़ दुनिया की पाठशाला
टांग अपने सपनो का बस्ता
जहाँ कीलें न कर पाएँ छेद पॉंव में
देख सके खुद को अपने परछाओं में
जहाँ सितारों की छांव में
सूरज ढलते हैं
चलो चलते हैं
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